Monday, 20 May 2013


सब वक़्त की दस्तक के मोहताज से होते हैं,
फिर भी क्यूँ खूँ मे, बगावत के अंदाज़ से होते हैं,
हर हाथ मेरे हाथों से, क्यूँ छूट ही जाता है?
बुरा इतना भी नहीं, क्यूँ सब नाराज़ से होते हैं?
नींद छोड़ जाती है मुझे, अब बेगैरत समझकर,
क्यूँ सब ख्वाब परिंदे की, परवाज़ से होते हैं?
मेरी बिगड़ती तबीयत का सबब पूछने, वो आएंगे?
हाल जिनके नाम-ए-मरीज से ही नासाज़ से होते हैं।
रसूख वालों के तसव्वुर मे बैठा है, जो दिल नहीं रखते?
ये लोग मशहूर तो तिजोरी की बंद दराज़ से होते हैं।

Friday, 3 May 2013


कितने दिनों से तेरा पैगाम तक नहीं आया,
क्या तेरे जहन मे मेरा नाम तक नहीं आया?
लौट आऊँगा मैं सूरज की तपिश से पहले,
कह कर गया था और शाम तक नहीं आया।
मुझको देखकर क्यूँ नज़र झुका ली तूने?
तेरे लबों पे मेरे लिए एहतराम तक नहीं आया।
शिकवा हो, गिला हो, आके कह दे तू मुझसे,
अभी बद-दुआओं का दौर अंजाम तक नहीं आया।
और क्या मिसाल दूँ मैं तकदीर-ए-यार की,
ज़िंदा मार गया मुझको, पर इल्ज़ाम तक नहीं आया।

Friday, 26 April 2013


मेरी खिड़की पे बैठा हुआ, चाँद देखो है क्या कह रहा,
अपने ग़म को जुबां से कहो, आंसुओं से है क्यूँ बेह रहा?
मौसम-ए-हिज्र मे भी ए साथी, हाथ क्यूँ तुम उठाए हुये हो?
वो मुनासिब तो होगा नहीं, आस जो तुम लगाए हुये हो।
हर तमन्ना है इक मौज सी, उठती और गिरती रहती है ये,
धूप और छांव है ज़िंदगी तो चलती और फिरती रहती है ये,
हौसलों की नुमाइश न कर, अपनी तू आजमाइश न कर,
ख्वाहिशें सब तेरी पूरी हो, बेतुकी ऐसी ख़्वाहिश न कर।
एक वादा किया था कभी, मैं निभा ही रहा हूँ उसे,
भूल कब का गया था मुझे, मैं भुला ही रहा हूँ उसे।
आंसुओं, मौसमो, ख़्वाहिशों का, ज़ोर मुझपे है क्या रह गया?
ज़िंदगी कर्ज़ तेरा बता, और मुझपे है क्या रह गया?

उसकी मासूमियत पे इल्ज़ाम लगाने लगी,
मेरी मुहब्बत पे ऐतराज जताने लगी,
सरहदों पे कितना यकीन करती है दुनिया?
दिल औ धड़कन मे दीवार उठाने लगी।
सूरत-ए-यार को हमने चाँद मे देखा,
दुनिया चाँद मे दाग गिनाने लगी,
ग़म, शिकश्त, नाकामियों के तोहफे मिलेंगे,
अंजाम-ए-उलफत से वाकिफ कराने लगी।
शब भर नही सोता जो मेरी सलामती की दुआ करके,
दुनिया उसका नाम दिवानों मे लिखाने लगी,
बड़े खुलूस से दिये थे जख्म जिसके सीने पे,
आज उसी की कब्र पे फूल चढ़ाने लगी।
गर कुर्बत नहीं होगी, तो क्या मुस्तकबिल होगा?
या खुदा, दुनिया तेरी मौजूदगी भुलाने लगी,
मुहब्बत ही बांधती है, एक धागे से दुनिया को,
दुनिया अपने पीर-ओ-मुर्शाद को आजमाने लगी।

Tuesday, 2 April 2013


JUST TELL ME, JUST TELL ME


Just tell me, just tell me, o my love, just tell me,
What and how, without you, my life would be?
How will it look like, when you are miles apart?
How’ll I breathe when you’ll go away, my heart?

Just tell me, just tell me, o my love, just tell me,
Won’t it be possible for you to stay with me?
All the colors are bright, when you are around,
I can see the Heavens, right here on the ground.

Just tell me, just tell me, o my love, just tell me,
I’ll look like a leaf, pale and fallen from its tree,
The colors will fade; the light won’t be any bright,
I won’t see them all, when you’re out of my sight.

Just tell me, just tell me, o my love, just tell me,
O Heavens! What a bane! How cruel of Thee!
Lord! To bear this pain, make my heart brave,
To me, it doth seem,, like lying alive in the grave.

Just tell me, just tell me, o my love, just tell me,
How’d I make myself more tolerant than thee?
But I’ll wait for the moment of your comeback,
When you’ll hold me tight and kiss me on my neck.

Just tell me, just tell me, o my love, just tell me,
How am I gonna greet you with tears of glee?
I’ll wish for your good when a star falls from the sky,
I feel strong enough to let you go, I promise I won’t cry.
No matter how long it takes, I’ll keep myself alive,
But yes, forgive me, if life betrays me, before you do arrive.
                        But yes, forgive me, if life betrays me, before you do arrive.

Tuesday, 19 February 2013

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है,
कि मैं इन्सान न होकर शैतान होता,
ज़िन्दगी में कोई दुःख न होता मेरी,
दुनिया के हर गम से मैं अंजान होता,
जो चाहता वो मुट्ठी में होता मेरी,
मैं अपना खुद का भगवान होता,

अब मेरे दिल में ये ख्याल आता है,
कि उनका सपना सच हो जाता है,
जो लोग सब तज नेता बन जाते हैं,
छाती चौड़ी करके वो तन जाते हैं,
लक्ष्मी, सरस्वती सब प्रसन्न हो जाती हैं,
धन, धान्य, खुशियाँ घर में आती हैं,

दुनिया के सब सुख मुझ पर बरसेंगे,
मेरे पडोसी मेरा जैसा बनने को तरसेंगे,
जहाँ भी जाऊंगा, मेरी जय जयकार होगी,
नेता जी, नेता जी आ गए ये पुकार होगी,
पर मुझे इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी,
अपनी इंसानियत की बोली लगानी पड़ेगी,

फिर मेरे दिल में ये सोच उभर कर आती है
क्यूँ इंसानियत पैसे के लिए बिक जाती है?
नेता बनूँगा, अमीर बनूँगा, बिक जाऊंगा,
पर आखिर में तो मैं भी चिता में सिक जाऊंगा,
क्यूँ फिर ऐसे पाप का मैं भागीदार बनू?
क्यूँ भ्रष्ट बनूँ मैं भी, क्यूँ मैं भी भ्रष्टाचार बनूँ?

मैं नेता बनूँगा तो आप लोगो की भावनाओं का,
आपकी संभावनाओं का, आपकी आशाओं का,
ज़िन्दगी वो नहीं जो सिर्फ अपने ही काम आये,
वो है कि मौत के बाद हर जुबां पे आपका नाम आये,
मैं नेता बना तो आपके हर अधिकार की ढाल बनूँगा,
अन्ना बनूँगा मैं, मैं अरविन्द केजरीवाल बनूँगा,
अन्ना बनूँगा मैं, मैं अरविन्द केजरीवाल बनूँगा!!!!!!

Thursday, 10 January 2013


My eyes are red, my hands are cold,
Bereaved are we all, left by you, bold.

Shivering lips utter words, barely a few,
Ashamed are we, be forgiven by you.

I don't know thy name, and I need not know,
Before your pious soul, my head, I bow.

Dreams in your eyes, black or blue,
Family stood by, to make them true.

Your words were soothing, smile was healing,
You were an angel, I have a feeling,

You fought a battle, with death for a long,
I mourn thy departure, dedicate this song.

You wanted to live, they tried their best,
We prayed to the Lord, left Him with the rest.

My dear sister, we all are ashamed,
Shocked but blank, whom to be blamed.
Shocked and aback, whom to be blamed.